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भारत बनना चाहता है

भारत बनना चाहता है एक नायक एक विचारक सुपरपावर महानायक भारत बनना चाहता है अमीरी का स्वर्ग , गरीबों का मारक जगत्गुरु, विश्वविजयी और महा संहारक भारत बनना चाहता है फ़ेसबुकिया सुपरस्टार , चाहिए बस लाइक 👌 चार विचारने को बुद्धि कम और  बतियाने को मुद्दे हज़ार भारत बनना चाहता है फेमस, ग्लैमरस, प्रेस्टीजियस, पायस हर सवाल उसको लगता दुस्साहस भारत बनना चाहता है फैन , प्रशंसक और पिछलग्गू सूरज निकलने पर जैसे कोई घुग्घू भारत बनना चाहता है संरक्षक, संस्कारी और कागज़ का वीर दबा देना चाहता वो बातें गंभीर भारत बनना चाहता है धार्मिक, पोंगा पंडित अनूठा वक़्त पड़े पे जो दिखा दे अंगूठा पर देखो आजतक का समय यही बताता है भारत जो चाहता है वही बन जाता है इस शोर में कोई मेरी बात सुनेगा क्या बस इतना बता दो मेरे भारत का बनेगा क्या... ??

हमारा हिंदी प्रेम

कल हिंदी दिवस था कल हमने देखा की हिंदी माँ को कई पुत्रों का स्नेह मिला कुछ तो गले से लटक गए ऐसे लटके की हिंदी माता को उनको कठिन शब्दों का मतलब पूछ के जमीन पे पटकना पडा। पर वाह रे हिंदी दिवस के हिंदी प्रेम वो लौंडे धरती पे गिरके रोये भी तो हिंदी में ही रोये। हम हिंदुस्तानी एक बेहतरीन प्रजाति हैं हमारे कुछ  क्रियाकलाप है जो की अपने आप में अलग ही हैं means ऊँचे दर्जे का swag है हममें। हम जानते हैं हम आलसी है इसीलिए ऐसे कई काम जिनको हमको रोज करना चाहिए उनके लिए एक खास दिन बना दिया है। जैसे एक मित्र जिनका सवेरा ही 11 बजे के बाद होता है वो भी योग दिवस पे चटाई लेके सवेरे 6 बजे सड़क पे पार्क की तरफ जाते दीखते है।  पूछने पे बताने में गर्व का अनुभव करके बताते है "यू नो फिज़िकल फिटनेस इस ए  मस्ट " पर इनको कौन बताये के भैया जी वीडियो गेम में भागने से तोंद के टायरों पे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा। उसी तरह शिक्षक दिवस पर जिस मास्टर को हम दिन भर गरियाते रहे के टाइम पे स्कूल नहीं आता उसी की गरिमा में कविता पढ़नी होती है  "हमारा मास्टर कैसा हो , वर्मा जी के जैसा हो"।  परन्तु हिंदी दिवस ...

स्वतंत्रता दिवस की विधि

कल स्वतंत्रता दिवस है , आज रात को नेता  राष्ट्र के नाम सन्देश देंगे |  मैंने भी मन में सोचा चलो में भी सन्देश दूँ ........... दोस्तों लो फिर वही तारीख आ गयी है जिसका हमको और हमारी देशभक्ति को बहुत इंतज़ार रहता है।  भाई जागो स्वतंत्रता लेकर खुद स्वतंत्रता दिवस आने वाला है। समझो भाई, उठो और वो अलमारी की दराज़ में रखी देशभक्ति निकाल लो, उसको धो पोंछ के सजा लो। साल में एक दो बार ही मौका मिलता है वरना कहाँ रोज रोज देशभक्ति लादे फिरें। हाँ तो स्वतंत्रता दिवस आ गया है, न घबराइए नहीं ये नहीं पूछेंगे की कौनसा है । बंद करदो जोड़ना घटाना , हम बता देते है 70 वां है।  स्वतंत्रता  दिवस हमारा राष्ट्रीय त्यौहार है, इसको मनाना ही चाहिए। मैं देखता हूँ कुछ भारतीय अलसाये रहते है, उनको स्वतंत्रता दिवस ठीक से मनाना नहीं आता या फिर वे भूल गए के कैसे मनाएं।  कोई बात नहीं हम यहाँ पूरी विधि "चेप" रहे है इसे देख के ही मना लेना।  टेंशन न लो बढ़िया मनेगा  आस पड़ोस वाले देखते रह जायेंगे के ऐसे मानते है स्वतंत्रता दिवस। बस  इसके लिए आपको कुछ चीज़ों की जरुरत होगी (उसकी भी list ...

भविष्य का इतिहास

आजकल हम इतिहास के स्वर्णकाल में जी रहे हैं | यक़ीनन ये इतिहास का स्वर्णकाल है | आजकल भारत में हर जगह इतिहासकार पैदा हो गए हैं | ये इतिहासकार इतिहास को इतिहास की तरह नहीं देखते अपितु एक भारी गलती की तरह देखते हैं | और जिसको ये हमारे इतिहासवीर बदल के ठीक करने के अथक प्रयासों में लगे हुए हैं | वे इस कार्य में इतने निपुण है कि कभी कभी तथ्य न भी होने की  स्थिति में वे स्वयं के मन मुताबिक तथ्य  उत्पन्न कर लेते हैं | असल इतिहासकारों में ऐसी प्रतिभा नहीं देखी गयी थी | हमारे इन इतिहासवीरों ने स्वयं "इतिहास" को आत्मविष्लेषण करने पे विवश कर दिया है | आज के दौर में आप तथ्यों की बात न ही करें तो बेहतर है , अन्यथा आपके ऊपर कुतर्कों की ऐसी बारिश की जाएगी कि आपकी आत्मा तक सोचने लगेगी कि कहीं मेरे द्वारा दिए गए तथ्य व्यर्थ तो नहीं | आजकल देखा जा रहा है ज्यादार तथ्य देना व्यर्थ ही हो गया है | आजकल इतिहास को तथ्यों की नहीं बल्कि कपोल कल्पनाओं की ज्यादा आवश्यकता है | जिससे किसी व्यक्ति या दल विशेष का स्वार्थ पोषित हो सके | सही भी है ऐसे इतिहास का भी  क्या लाभ जिससे किसी बिचारे का धंधा भी न च...

मानहानि

आजकल भदवि के सेक्शन 499 का प्रचुर मात्रा में उपयोग किया जा रहा है | अरे डरिये मत साहब कानून नहीं सिखाएंगे सेक्शन 499 का संबंध है मानहानि यानि Defamation से | आजकल इस क़ानून का भरपूर प्रयोग किया जा रहा है | आप को जान के आश्चर्य होगा के आजकल जिन लोगों का कोई मान नहीं है उनकी भी मानहानि होने लगी है | ये सब महिमा इसी कानून की तो है | उदाहरण के तौर पे शर्मा जी  रोज  गलियां खाने का शौक़ीन  है | उनको खाना पचाने के लिए गालियां सुनने की आदत सी है | पर रोज रोज कौन गाली देने वाला ढूंढें इसीलिए हमारे शर्मा जी ने शादी कर ली , अब रोज शाम को प्राणप्रिया पत्नी से करतल ध्वनि के साथ गालियों का आनंद लेते है | पता नहीं किस कलमुहे नासपीटे को ये बात नागवार गुजरी उसने इस कानून के बारे में शर्मा जी को बता दिया , फिर क्या शर्मा जी ने आव देखा न ताव बीवी सहित 45 लोगों पे मानहानि का मुकदमा ठोक दिया |  दुविधा ये हुई के बाकी लोग तो सहन कर गए पर बीवी तो  घर में दुर्गा का रूप लिए बैठी थी |  घर पहुँचते ही शर्मा जी को भैरो बाबा बनने में टाइम नहीं लगा | पूछिये मत साहब आलम यह है...

कहीं किसी रोज ....

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आज सुबह में देवयोग से जल्दी उठ गया।  कोई कार्य न होने की वजह से पार्क की तरफ चल निकला।  पार्क वहीँ जहाँ गिरे पड़े लोग ऊंघते हुए ये देखने आते हैं कि उनके शरीर में कितनी जान है।  देखा वहां बहुत सारे लोग जा रहे थे उत्सुकतावश में भी पहुँच गया।  परन्तु वहां पहुँच के कोई दैवीय अनुभूति तो नहीं हुयी,वरन आश्चर्य जरूर हुआ।  देखा वहां कुछ और लोग भी आये थे न सिर्फ आये थे अपितु ऐसे क्रियाकलाप करने के विचार में भी थे जिससे उनकी कुछ सालों की जिंदगी कुछ मिनटों में खत्म हो सकती थी।  वो बुजुर्ग तो इतना थक गया था कि प्रशिक्षक के बार बार कहने के बावजूद उन्होंने पदमासन  में आने की बजाये शवाशन में ही रहना बेहतर समझा। वही दूसरी और एक और भाईसाहब lift मांग रहे थे पास जाके के देखा तो वो तो योग ही कर रहे थे ! वहीँ दूसरी और कुछ नयी उम्र के अधेड़ योग वगैरह में अपना जीवन न नष्ट करते हुए बड़ी ही सार्थक बहस में मशगूल थे "ये राहुल है  कहाँ , आजकल TV पे दिख नहीं रहा "  "अरे थाईलैंड चला गया होगा "! मतलब अच्छा हुआ राहुल राहगीरी करते हुए सड़कों पे नह...

ROADS TO DANGEROUS SILENCE...

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RECENTLY our newly formed government filed a petition in the supreme court against the free speech of ours' in the form of reasonable restriction on the lines of draconian IT act.To whom who don't know what does it actually mean lemme clarify it more with an example say if u killed a person in an accident on road the punishment will be only for 2 years but under this act if u wrote something like "calling a jerk a jerk" than u'll be punished for 3 years which can go up-to 5 years. the same people when in opposition said we are totally against this act but the proverb rightly said "Absolute power corrupts absolutely". now the same people are talking of the things like "responsible writing" and "reasonable restriction".But no one is seems interested to tell who will be the enlightened one to identify and differentiate between reasonable and  unreasonable writings .And who will create the benchmarks for these reasonable restriction.G...